सोमवार, 22 अगस्त 2016

कबरा पहाड़ गुफा जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
Rock Paintings of Chhattisgarh : Kabra gufa 

रायगढ़ जिला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व तक उडिसा राज्य की सरहद से लगा हुआ है। इसका उत्तरी क्षेत्र जहां बिहड़, जंगल, पहाडियो से आच्छादित है। वही इसका दक्षिण हिस्सा ठेठ मैदानी है। आदिमानव आज की तरह घर नहीं बना सकते थे। वे मौसम की मार और जंगली जानवरों से बचने के लिए प्राकृतिक रूप से बनी गुफाओं में रहते थे। उन्हीं गुफाओं को शैलाश्रय (चट्टानों के घर) कहते हैं।
आदिमानव उस समय जो भी देखते थे को उन गुफाओं में चित्रकारी कर अंकित किया करते थे, जिन्हें रॉक पेंटिंग (शैल चित्र) कहा जाता है।प्रागैतिहासिक काल के मानव सभ्यता के उषाकाल में छत्तीसगढ़ भी आदिमानवों के संचरण तथा निवास का स्थान रहा हैं।
कबरा पहाड़ के शैलाश्रय पुरातात्विक स्थल है। मैंने गुफा में लगभग 2000 फ़ीट की खड़ी चढाई चढ़कर ऊपर तक जाकर देखा है। जो रायगढ़ से 8 कि.मी. पूर्व में ग्राम विश्वनाथपाली तथा भद्रपाली के निकट की पहाड़ी में स्थित है।
उस समय यह पहाड़ घनी झाड़ियों , वृक्षों से घिरा हुआ दुर्गम था , तथा वहा तक पहुचने के लिए हमे काफी चलना पड़ा था. रस्ते में अनेको सर्प तथा अन्य जीव-जंतु भी नज़र आये थे।
कबरा शैलाश्रय के चित्र भी गहरे लाल खड़िया, गेरू रंग में अंकित है। इसमें कछुआ, अश्व व हिरणों की आकृतियां है। इसी शैलाश्रय में जिले का अब तक का ज्ञात वन्य पशु जंगली भैसा का विशालतम शैलचित्र है। इसका मतलब यह है की ये जानवर उस समय वहां पर अधिक पाए जाते थे।
कबरा शैलाश्रय के चित्रों में रेखांकन का सौंदर्य जिले के अन्य सभी शैलचित्रों से अच्छा बताया जाता है।
इसके साथ ही मध्य पाषाण युग के लंबे फलक ,अर्ध चंद्राकार लघु पाषाण के औजार चित्रित शैलाश्रय के निकट प्राप्त हुए थे। जिसका उपयोग आदि मानव कंदमूल खोदने में या शिकार करने में पत्थर को नुकीले करके उपयोग में लाते थे। मध्य पाषाण काल को पुरातत्वविद 9 हजार ई पू से 4 हजार ई पू के बीच का मानते हैं।
इस काल में ही आदिम मावन ने पशुओं को पालतू बनाना सीखा था। नव पाषाण काल का प्रमुख अविष्कार पहिया को माना जाता है।
नदियों की घाटिया मानव की सर्वोत्तम आश्रय स्थल रही है। और ये छेत्र महानदी घाटी में आता है।
वर्ष १९९० में जब मैंने इसे पहाड़ पर चढ़कर जब देखा था ,तो यहाँ कोई नाम लिखकर या वहा जाकर गुफा में तपस्या करने के नाम पर दीपक की कालिख से इन्हें बर्बाद कर रहा था।
वैसे मुझे इस सम्बन्ध में स्व, श्री अनुपम दस गुप्ता जो की नवभारत समाचार पत्र के रायगढ़ में संवाददाता थे से ही ज्यादा जानकारी मिली थी। व उन्ही के मार्गदर्शन में मैं वहा पर गया भी था ।
कुछ फोटो मैंने Rock Paintings of Chhattisgarh : Kabra
By Debayans On 2015-07-10 In Chhattisgarh, my Indianess से साभार लिया है




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें